भागो यहाँ से। दूर जाओ मेरी जिंदगी से

सुनसान कमरे में वो तन्हाई से बैठी हुई है। बड़े घर की बड़ी दीवारे और भी बड़ी लग रही है। घर के अन्दर एक अजीब सी ख़ामोशी है। ऐसा लगता है कि वो बड़ी दीवारे उसको निगलने के लिया उसकी तरफ आ रही है। नहीं,उसको इस खामोशी से डर नहीं लगता है। ना तो कभी उदासी उसको डरा सकी है और न ही उसको सुनसान जगह से डर लगता है। उसका मन उदास है। ऐसा क्यों महसूस हो रहा है कि यह खामोशी और उदासी में कुछ नयापन नहीं है। उसे ऐसा पहले भी ऐसा महसूस हुआ था। अपने बचपन में वो फिर से झांकने की कोशिश करती है। थोड़ा और जहन में जोर डाला तो एहसास हुआ कि यह वही भावनाए है जो उसको अब्दुल के शहीद होने पर हुई थी। लेकिन उस समह वो अकेली नहीं थी। माँ उसके पास थी और वो सैनकों से घिरी हुई थी। हज़ारों की उस भीड़ में वो अकेली और उदास बैठी हुई थी। तब उसकी आँखों में डर कोहो दूर था। लेकिन अब हालात अलग है।

कुछ दिनों से अजीब से सपनों से डर कर नींद से जग जाती है। अब क्यों आता वो उसके सपनों में? कहानी तो ख़तम हो चुकी है। पर साथ में उसकी रूह भी टूट कर बिखर चुकी है। नहीं ,वो अभी मैदान में खड़ी हुई है। उस में अब भी समर्था है वो दोनों की तरफ़ से पुरानी यादों को जिन्दा रखने की। उसने सच्च ही तो कहा था,”फिर कया हुआ आप भूल जाओगो पर मैं हम दोनों के लिया अपनी उन यादों को जिन्दा रखूँगी।” हैरानगी से उसने भी तो ठीक कहा था,”हम मिले जा ना मिले हमारे प्यार कोई खत्म नहीं कर पायेगा। यह हमेशा जिन्दा रहेगी। जिस्मों की दूरी कोई अर्थ नहीं रखती क्योंकि हमे रूह से कोई अलग नहीं कर सकता। ” वो सोचती है ,” आपने ठीक कहा था.जिस्म तो अलग चुके है। रूह अब भी एक है। दो दिन से मुझे महसूस हो रहा है जैसे आप मुझे बहुत याद कर रहे हो। ”

फिर उसकी निगाह कमरे के कोने पर पड़ती है। वो ख़ामोशी से खड़ा हुआ उसकी तरफ देख रहा है। वो जोर से कहती है, “भागो यहाँ से। मुझे आपकी जररूत नहीं है। मैंने आपके बगैर साँस लेना सीख लिया है। भागो यहाँ से ,क्यों आये हो। कितनी बार कहा था कि मुन्ना जैसा हर कोई नहीं बन सकता। उसके जैसा लिए बनने के लिया आग से निकल कर जाना पड़ता है। आप ने तो जनाब कमाल ही ऐसा कर दिया। मुन्ना की कहानी ही ख़तम करदी। मुन्ना को ख़तम करके आप सारा को होंद में लाने में कामजाब हो गये। मुन्ना को लोग बहुत प्यार किया करते। जिससे भी वो बात करती थी। ना जाने क्यों लोग उसकी भोली भाली बातें सुन कर कील हो जाते थे। आप ने उसका शरेआम कतल कर दिया। उसकी रूह को मार डाला। सारा से कोई नहीं प्यार करता। मुना दिल से बोला करती थी आप ने उसके तो दिल को हज़ारों टुकड़ों में बांट दिया। आप के जाने के बाद उसने खुद को और मार डाला। रूह तो उसकी कतल हो गई पर कोई उसकी ज़मीर को नहीं मार डाला।  माफ़ करना आज आप यहां अपनी मर्जी से नहीं आये बल्कि मैंने खुदा से सच्चे दिल से जिद किया था इसलिए आप आज यहाँ पर है। ”
वो अपनी आँखों के आंसू साफ़ करती है। इसकी नजर हाथों पर लगी मेंहदी जाती है। और मेंहदी से लिखे हुए अपने अजीज़ के नाम को देखती है। कुछ दिन पहले ही तो उसने अपने हाथों में मेंहदी से उसका नाम लखाया था। साथ में बैठी उसकी बहन ने कहा कब तक यह सिलसला चलता रहेगा। लोग क्या कहेंगे। वो गुस्से से अपनी बहन की तरफ देख कर चलाई,”एबा. मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहैगें। वो जिन्दा है ज़मीर मरी उसकी लेकिन सांसें नहीं। जब तक हमसे एक जिन्दा है तब तक मेंहदी से उसका ही नाम लिखा जाएगा। अगर आप को अच्छा नहीं लगता तो यह मेरी इसमें कोई प्र्ब्लेम नहीं है। ”

बड़ी दी उसको समझने की कोशिश असफल कोशिश करती है,” तुम बीस साल से आपने सपनों के पीछे भाग रही हो। तुम समझती क्यों नहीं हो कि वो वक़्त अब ख़तम हो चूका है। बहुत देर हो चुकी है। ”
वो मुस्करा कहती है,”एबा, वक़्त ख़तम हुआ है। मेरे सपने मर चुके है। मेरे अरमान खत्म हो चुके है। लेकिन मेरी मौहबत आज भी जिन्दा है।’
वो कोने की तरफ़ घूम कर देखती है,”बब्बी, आप को तो पता है एबा ने हमेशा कोशिश की मुझे अकेला करने की। माँ और चाचू हमेशा यही कहते हैकि एबा का दिल साफ़ नहीं है। उसमें लालच भरा हुआ है। इसमें कोई शक नहीं वो ठीक कहते थे। पर आपने तो वायदा किया था मुझे उससे बचा कर रखने के लिया। पर आप तो बिना कोशिश किया असफल हो गये। सो मेहरबानी करके चलते बनो। जाओं यहाँ से। लोट कर मत आना।’
रोते हुए उसको भगाने के चक्कर में पता ही नहीं चला कब रात बीत गई। सुबह अलार्म के साथ उसकी आंख खुली और हररोज़ की तरह उसने बाबा नानक जी और अल्लाह से दुअ मांगी,”मुझे बिस्तर से उठने की ताकत दो। एक और दिन गुज़ारने की ताकत दो। अब तो सिर्फ आप के सहारे जीना रहना है और यह जिन्दगी का सफर तह करना है।”

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