रोती क्यों हूं

 

 

उसका दिल आज फिर से उदास है। उसके अचानक उदास हो जाने का कोई तो कारण होता है। पर कभी कभी उदासगी बिन किसी कारण के उसकी रूह पर कब्ज़ा केर लेती है। सुना है अगर प्यार अधूरा रह जाए तो कहीं ना कही इन्सान अपने अन्दर से एक ताकत लाता है। फिर अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है। वोह आज भी यह पूछती है कि किसी के पास उसके टुकड़े हुए विस्वाश को वापस लाने की ताकत है। नहीं, शायद किसी के पास भी नहीं है.किसी ने बहुत गलत कहा था “क्यों रो रही हो इतना। इसलिए क्यूंकै उसने तुम को डम्प कर दिया है। ” ज़वाब तो था उसके पास पर उसने जवाब देना उच्चित नहीं समझा। साफ जाहिर था के वो औरत ज़वाब के हकदार नहीं थी। वो उसके ज़वाब के काबल नहीं थी। कैसे हो सकती थी वो औरत इस काबल। उसका जवाब उसने के लिए किसी के अन्दर उसकी जमीर का जिन्दा होना जरूरी है। पर उस औरत की ज़मीर उस वक़्त खतम हो चुकी थी जब पहली बार उसे जान से खतम करने की नकामजाब कोशिश की थीं।

यह जानने के बाद भी कि दूसरी महिला दुखी है और उसका दिमाग किसी भी समय टूटने के कगार पर है, लेकिन चालाक महिला उसे भावनात्मक रूप से प्रताड़ित करती रहती है। जल्द ही लगभग 4 साल हो जाएंगे, लेकिन वह अभी भी दुखी है और अपने दर्द से जूझ रही है। हमेशा की तरह, महिला अपने राक्षसों और शैतानों को हराने में सफल रही है। एक बार फिर वह बिना किसी की मदद के अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं। उसकी सफलता के लिए लोग उसकी ताकत और उसके पिता के सिद्धांत को श्रेय देते हैं लेकिन वह अल्लाह और बाबा नानक जी के समर्थन को श्रेय देती है।

वो आज भी रोती है, लेकिन सवाल ये है कि वो अब भी क्यों रोती है। अब उसके आंसू कोई नहीं देख सकता। वह रोती है इसलिए नहीं कि उसने उसे छोड़ दिया था। वह रोती है क्योंकि इस्लाम में उसका विश्वास खो गया है। जब वह छोटी थी, तब मौत उसके करीब थी और कुछ सांसे बची थी । लेकिन उसकी माँ ने अपनी मरती हुई बेटी को एक मुसलमान की दरगाह पर रख दिया था जहाँ उसने फिर से जीने के लिए दूसरी सांस ली थी। जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई इस्लाम में उसका विश्वास बढ़ता गया। लेकिन उसके अजीज ने उसे अकेले मरने के लिए मस्जिद की चौखट पर छोड़ दिया। वह रोती है क्योंकि उसके प्यार की वजह से इस्लाम में उसका विश्वास टूट गया है।

वह रोती है क्योंकि उसकी रक्षा करने वाला ही उसको छोड़ की तरह भाग गया है। वो आज भी रोती है क्योंकि उसने अपने जीवन का प्यार खो दिया है। वह रोती है क्योंकि उसकी आत्मा अंधी थी और वह उस आदमी को पहचानने में असफल रही जिससे वह सबसे ज्यादा प्यार करती है। वह रोती है क्योंकि वह अभी भी उससे नफरत नहीं कर सकी न वो उसको भूल नहीं सकी है । वह रोती है कि वह दूसरों की तरह भौतिकवादी और स्वार्थी क्यों नहीं है। वह रोती है क्योंकि वह गलत सदी में पैदा हुई थी। उसकी आत्मा अटक रह गई है और वह आगे नहीं बढ़ सकती। वह सोचते हुए रोती है, “काश मैं भी आपके जैसा होती तो मैं दिखावा कर सकती कि कुछ भी नहीं हुआ है लेकिन मैं अभी भी सड़क के बीच में खड़ी आपका इंतजार कर रही हूं।”

रात को रोते रोते वो सो जाती है। जब सुबह होती है तो वो खुदा से दुआ करती है कि मुझे आज फिर उठने की ताकत दो। हालात ने उसको पहले ही इस दुनियाँ में एकला छोड़ दिया था। पर उसके अजीज ने वो भी उससे छीन लिया। जो दुनिया देने का वादा किया करता था उसने तो उसकी दुनिया ही छीन ली। अब वो इसलिए रोती है कि उसने खुदा से बढ़ कर उससे मुहाबत की थी। वो रोती है उसने उसे खुदा से भी अधिक यक़ीन किया था पर उसकी वजय से अब वो सब को शक की निगाह से देखती है। सो अब मत पूछना के वो क्यों रोती है। क्यूंकि शब्द तो ख़तम हो जाएँगे और उसकी सांसे ख़तम भी हो जाएँगी लेकिन ना तो उसकी मुहाबत कम होगी और ना उसकी आत्मा के आंसू। एक दिन उसी के यह आँसू आंधी लायेगें। वो तो जा चुकी होगी पर अपनी एक कहानी छोड़ जाएगी।

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