बिना किसी अर्थ के एक कहानी

एक समय था जब उसके अपनी बहन के साथ बहुत अच्छे संबंध थे। वो अपनी बड़ी बहन को माँ का दर्जा दिए करती थी । बाद में, उसकी बहन के लालच ने इस रिश्ते को तनावपूर्ण बना दिया। अपनी जाती से बाहर व्यक्ति को प्यार करने की वज़ह से उसकी बहन के साथ उसके तनावपूर्ण संबंधों की आग को प्रज्वलित कर दिया था। अक्सर उसको अपनी बहन की बात सुनाई देती है, “तू ने हमारे परिवार का नाम को कलंकित कर दिया है। माँ जिन्दा होती तो तुझे गोली मार कर ख़तम कर देती।”
उसने कभी अपनी बहन को उल्टा कर यह नहीं कहा था,” दीदी, अगर मां ने मुझे मारना होता तो वोह दो दशक पहले ख़तम कर देती। ” लेकिन उसने कभी भी अपनी बहन को उलटा कर ज़वाब नहीं दिया था तो अब वो ऐसा कैसे कर सकती थी।
माँ ने जो आखरी फैसला लिया था उसमें उसका कोई कसूर नहीं था। न ही उसने कभी एकेला रहना चाहा था। यह तो उसकी किस्मत थी कि इस भरी दुनियां में एकेला रहना पड़ गया था। दोनों बहनो के बीच में ख़ून का कोई रिश्ता नहीं है। पर दोनों की परवरिश तो एक जैसी और एक ही माँ ने की थी। चाचू हमेशा कहते थे,”रिश्ता खून से नहीं दिल से बनता है। ”
माँ कहती थी,”इन्सान के गुण कभी कभी बनते नहीं पैदा हुए करते है। असली खून की पह्चान तो वक़्त ही बताता है। ”
रिश्ते में लगते उनके चाचा ने कहा, “मुन्ना, एहि एक वक़्त है ठन्डे पड़ चुके हुए रिश्ते को फ़िर से जिन्दा करने का। तुम दोनों को एक दूसरे की जररूत है। ”

अंकल ने आगे कहा, “मुन्ना, मैं तुम्हारी बहन से यह उम्मीद नहीं कर सकता, लेकिन मुझे आपसे उम्मीद है।”
वह आह भरती है, “चाचा, आप मुझसे क्या चाहते हैं? हमेशा सब कुछ मैं ही क्यों करू? क्या बड़ों को कोई भी कर्तव्य नहीं है। ”
उसके चाचा जो एक सेवानिवृत्त उच्च पदस्थ वायु सेना अधिकारी, धीरे से उसे कहते हैं, “मुझे नहीं पता कि मैं कब तक जीवित रहूंगा। हमारा कोई बड़ा परिवार नहीं है। तुम दोनों अलग-अलग दिशाओं में चल रहे हैं। कम से कम अपने माता-पिता के लिए ही एक दूसरे का साथ दो। तुम छोटी हो । क्या यह तुम्हारी जिम्मेदारी नहीं बनती है कि आप पहले एक कदम दोस्ती का बढ़ाएं?”
बुजुर्गों के सम्मान में, वह ना नहीं कह सकती थी। उसने आह भरी, “ठीक है, मैं ही एक कदम उठा लेती हूं।”
चाचा जी कहते , “यह हुई ना मेरी बच्ची । तुम्हारे पिता को तुम पर बहुत गर्व होगा।”
उसने उल्टा कर चाचा को कहा, “यह कह कर आप ब्लैकमेल कर लेते हो। ‘
पर अपने मन में सोचती है, “यह किस प्रकार की परंपराएं और रीति-रिवाज हैं यो सिर्फ छोटो को करने पड़ते है ?”
खैर, उसने अपनी बहन को आमंत्रित किया। आज वो दिन है जब उसको अपनी बहन को एकला मिलना होगा।
जीजा जी उसकी बहन को मुख्य दरवाजे पर छोड़ कर वापस चले गए। उसने अपने चेहरे पर मुस्कान ला कर दरवाजा खोला। उसे लगा आज उसकी मुस्कान बनावटी नहीं है। यह अपने आप उसके अन्दर से आई है। बहन ने भी मुस्करा कर प्यार से उसके वालों को अपने हाथ से छुया।
उसकी बहन उससे कम से कम 20 साल बड़ी है। वह पहले से अब कमजोर दिखती है। और उसका सुंदर चेहरे पर झुर्रियों के निशान दिखाई देने लगे है। लेकिन वह हमेशा की तरह आज भी बहुत सुंदर है।

दोनों में कुछ देर के लिए ख़ामोशी छाई रही जिसको बड़ी बहन ने तोडा,”मुन्ना, तूने अपने वालों का क्या हाल कर रखा है।”
बड़ी बहन उसके वालों को मालिश करते हुई हसी,”अगर माँ होती तो तेरे वो यह दो चार बाल भी उत्तार रख देती। ”
अब वो भी हॅसने लगी, “आप को याद है, बडी एभा। माँ कैसे हर ऐतवार को बालों का मुर्गा बना देती थी। ”
फिर दोनों अपने चाचू और पिताजी के बारे में बातें करती रही। बस दोनों में यह तीन लोग ही थे यो उनका रिश्ता बनाते थे। यह तीन लोग ही उनकी यादों का ख़जाना था। उन तीनों के जाने के बाद उनकी अपनी अपनी अलग की दुनियाँ है।
बड़ी बहन ने पूछा, “मुन्ना, यह बता तुम्हारे फ़ोन पर किस की फोटो है। क्या बीनू की है? मेरे बच्चों ने बहुत वार पुछा कि ऑन्टी के फ़ोन पर किस की पिक्चर है। ”

उसका चेहरा उदास हो जाता है। पर वो अपनी उदासी को छुपाने की कोशिश करती है, “नहीं , बड़ी एभा। बीनू तो बहुत खूबसूरत था।”
अपनी बहन का ध्यान दूसरे तरफ करने के लिए वो कहती है,”बड़ी एभा, आप को पता है। मुझे कभी भी बीनू से ईर्ष्या नहीं होती थी। सिर्फ मुझे यह कभी अच्छा नहीं लगता था कि वो मुज़से क्यों गोरा था। मुज़को गोरी होना चाहिए था। ”
बड़ी बहन उसको ध्यान से देखते होती है, “मुना, वो ईर्षा नहीं थी। सिर्फ तुम दोनों में यही एक अन्तर था यो तुम को अच्छा नहीं लगता था। ”
वो मुस्कराती है,” नहीं, बड़ी एभा, बीनू लड़का था और मेँ लड़की थी। ”
बड़ी बहन की जिज्ञासा और बढ़ गई, “क्या यह अबदुल्ला की पिक्चर है। ”
उसकी आँखों मैं अब आंसूं थे। उसने भरी आवाज़ में कहा, “नहीं, बड़ी एभा. अब्दुल्ला तो बहुत हैंडसम था। यह तो नज़र ना लगे इस लिए रखी हुई है। आप को अब्दुल्ला याद है। ”
बड़ी बहन, ” थोड़ा थोड़ा सा। यो भी हुआ वो अच्छा नहीं हुआ था। लेकिन सुनो, सभी एक जैसे नहीं होते। तूने अबू ढूढ़ने में ग़लती की है। इस फ़ोटो को अब उत्तार दो। ”
लेकिन मुन्ना अपनी आँखों को थोड़ा सा बन्द करके और नाक को थोड़ा सकूँड़ कहती है.” नहीं, बड़ी एभा। मुझे और कुछ नहीं चाहिए। मेरे पास बस एहि बचा है। सब कुछ तो चला गया। फ़िर जिन्दा रहने के लिया मेरे पास और कुछ भी नहीं है।”

यह कहते हुए उसकी आँखों में आंसूं नहीं आए थे। इस बार बड़ी बहन की आंखों में आंसू थे। बड़ी बहन ने उसको गोद में लेते हुआ कहा , “मुझे माफ़ कर देना, मुन्ना। आज पता लगा माँ तुम को इस लिये अधिक प्यार नहीं करती थी कि उसने तुम को जन्म दिए था। वो इस लिए तुम्हे प्यार करती थी क्यूंकि तुम और पिताजी में कोई फ्रक नहीं है। ”
बड़ी बहन उठ कर चलने लगी, तो मुन्ना बोली,” बड़ी एभा। आप का शुक्रिया मेरी गैरहाजरी में मेरे लायन कब्स की देखभाल करने का। ”

बड़ी बहन तो चली गई। पर मुन्ना सोचने लगी,” मुन्ना तो कब की मर चुकी है। पता ही नहीं चला उसको उसके ही विचारो ने कब उसको सारा से सीरी बना दिया।”
हाँ, उसके दिल में अपने बब्बी के लिए मुहाबत देख कर किसी ने कहा था,” मुजूदा वक्त की पुरानी सीरी फरिहाद की मुहाबत। “

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