about some thoughts-1

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वक़्त इंसान को बदल देता है या फिर इंसान वक़्त को बदल देता है। इस कोई फर्क नहीं पड़ता कौन किसको बदलता है। पर फर्क पड़ता है इस बात से एक इंसान बदल जाता है। जब कोई इंसान बदलता है उसके साथ उसकी इंसानियत और उसकी पहचान भी बदल जाती है। कुछ तो ऐसे हालात होते है जो इंसान को बदल कर रख देता है। क्या कभी सोचा है। कि इंसान को बदलने वाला कौन होता है। कोई और नहीं उसके अपने ही अजीज़ होते है। अगर कोई बाहर वाला आ आकर इंसान को बदलने की कोशिश करता है तो इंसान उसकी बात को गंभीरता से नहीं लेता।


सिर्फ इंसान ही नहीं बदलते। कहते है वो लोग जो कभी उस इंसान को बेपनाह मुबाहत किया करते थे वो ही बदल जाते है। गिरगिट की तरह उनका रंग बदल जाता है। यो कभी यह कहा करते थे कि तुम बिन जीना ही क्या। यकीन मानो वही आप का कतल करने में दो पल नहीं लगायेंगे। यही तो मतलबी जिंदगी का दस्तूर है।

कहाँ गए वोह सब लोग यो उसकी सांसों में सांसे लिए करते थे। अब वो ढूंढ़ने पर भी नहीं मिलते। कहाँ गया वो शक्श जिसकी सुबह शरू और रात उसके बातें करते हुए करती थी। कहाँ है उसकी मुहबत का बादशाह जो जिंदगी की हर ख़ुशी उसको देना चाहता था पर वो उसकी रूह को बेहरमी से मार कर अलोप हो गया।
अब वो अक्सर सोचा करती है। कहां वो लोग जो हर रोज़ उसको दुआ सलाम किए करते थे। लेकिन अब वो कही पताल में खो चुके है। माँ अक्सर कहाँ करती थी दोस्ती और रिश्ते का सही मतलब तब ही पता चलता है। जब बुरा वक़त आता है। माँ यह भी कहती थी कि कभी कभी उन रिश्तो और दोस्ती की परख करनी चाहिए क्यूंकि सच तो सिर्फ फिर ही सामने आता है।

आज वो हज़ारों की भीड़ में अकेली है। उसका चेहरा मुस्कराता है पर आंखों में उदासी और दिल में आंसू है। यह तो सिर्फ खुदा जानता है कि ऐसा कौन सा गुनाह उसने किया था कि उसकी रूह को जिन्दा मरना पड़ा। गुनाह भी उसने गंभीर किए था। खुदा गवाह है उसने अपने दिल की गहराई से प्यार किया था। उसको खुद पर यक़ीन नहीं था जितना उस शक्श के साथ था जिसको वो बेपनाह मुहाबत करती है। जिसको वो चाह कर भी नफ़रत नहीं कर सकी।
वो सांसे तो ले रही है पर पता नहीं क्यों। न ही किसी पे भरोसा और न ही किसी से साथ उसको कोई लगाव रहा है। पर उसको यह समझ में नहीं आता कि वो रात को चैन से कैसा सोता है। जब से वो उसकी जिन्दगी से बाहर हो गया तो उसने भी सभी को अपने दिल से निकाल दिया।
अब वो सोचती है,” नहीं ,आप मुज़को खुश रखने के लिए नहीं आये थे। और ना आप मुज़को मुहाबत करने आये थे। आप तो सिर्फ मुज़को बर्बाद करने आये थे। मुझे जिन्दा दफनाने आये थे। खुदा ने मेरी सज़ा के रूप आप को मेरी जिन्दगी में भेजा था।”

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