बेखौफ

हमेशा उसके दिल में एक डर हुआ करता था। वो हॅसने से डरा करती थी। उसके दिल में से आवाज़ आती थी कि मत खुश हो,कहीं रोना ना पड़ जाए। मानव जाती थी तो कैसे रोक पाती अपने आप को मुस्कराने से। फिर वो उसको प्यार ही इतना करता था कि वो खुश होने से अपने आप को रोक नहीं पाती थी। वो उसको कहा करती थी,”नहीं, मुज़को हसना नहीं चाहिए क्युंके में रोना नहीं चाहती। ” और वो उसको लोट कर कहता था,”मैं तुझे कभी रोने नहीं दुँगां। मैं तुमको दूनिया की हर खुशी देना चाहता हूं।”


वो तो सिर्फ अब खुदा ही जानता है कि उस लम्हों में खुश होने की अब वो क्या कीमत अदा कर रही है। लेकिन अब वो डरती नहीं है। बहुत बेखौफ सी हो गई है। डर कोसों दूर भाग गया। उसके पास बचा ही क्या है जिस्को खोने का डर उसके मन में आए।
खुदा की यह लीला ही इतनी निहारी है के वो किसी को इसका पता ही चलने नहीं देता। इंसान की जिन्दगी भी कितनी अज़ीब है कि हर पल और कदम में इन्सान को ही बदलती रहती ही। कितना अच्छा होता अगर इन्सान उतना ही भोला होता जितना वो एक छोटा सा बच्चा होते हुआ करता था। अगर ऐसा होता तो आज इन्सानियत की तस्वीर ही कुछ और होती।

कभी कभी कहीं ना कहीं उसको कोई ना कोई यह सलाह देना नहीं भूलता कि तुम अब बच्चा नहीं हो इसलिए बड़ो जैसा वरता करो। वो हमेशा मुस्करा के कहती है, “मेरे नाम का मतलब पता क्या है। नहीं पता तो में बता देती हूं। मेरे नाम का मतलब है प्यारा सा छोटा सा बच्चा। मैंने कभी भी बड़ा नहीं होना। बड़े होने से इंसान बुरा बन जाता है। मैंने ऐसे ही पागल सा प्यारा सा बच्चा बने रहना है।”

कहती तो वो हमेशा यह भी थी कि भगवान तो मेरे और सभी के दिल में रहता है। तो फ़िर में उसको ढूढ़ने के लिए क्यों भटकती रहूं। लेकिन सुना है उसके और भगवान् के साथ अब हमेशा झगड़ा रहता है। क्यूंकि उसका सोचना है कि भगवान को पता होना चाइये था कि वो अपने बब्बी को कितना दिल से चाहती है। फिर उसने क्यों उसको जाने दिया।

उसकी रूह बेखौफ सी हो गई है। ना तो उसको किसी अजनबी से डर लगता है और ना ही अपने सो। किसी को सलाम और कलाम ना करने वाली उसकी रूह अब किसी से भी झगड़ा करने में डरती नहीं। वो अपने बच्चों से भी बच्चों जैसा झगड़ा करती है। उसके पास इस बात का कोई ज़वाब नहीं था जब उसका बेटा उसको कहा था,”माँ, हमारी माँ तो दो साल पहले ही मर गई थी। यह तो सिर्फ एक जिस्म बचा है यो सिर्फ अपना फ़र्ज़ निभाने के लिए जिन्दा है.”

उसकी आँखों में आँसू भर आये थे कोई ज़वाब नहीं था उसके पास। तो अपने ही दिल पर हाथ रख कर उसने अपने खुदा से कहा,”सुना, सच्च ही कहा मेरे बेटे ने। है आप के पास उसकी बात का ज़वाब। मेरे पास तो नहीं है। ठीक ही कहा है उसने। दो ही घंटों में उनकी माँ की रूह का कतल हुआ था। और आप चुप चाप मेरे दिल के अन्दर छुप कर मेरा ही कतल होते देखते रहे।”

लेकिन हो सकता हो उसकी रूह को मार कर ही खुदा ने उसको बेखौफ बना दिया है। हो सकता है इसके पीछे भी उसके खुदा की कोई मर्ज़ी हो। हो सकता है खुदा ने किसे आने वाले तूफ़ान का मुकाबला करने के लिए उसको बेखौफ बना दिया हो। उसके दिल में बचपन से बैठा हुआ उसका विश्वास उसको हमेशा यह अहसास कराता रहता है कि खुदा उसके दिल में रहता है। वो जो भी करता है वो इंसान की भलाई के लिए करता है

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