उसके विचार और यादें-1

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जब वह पश्चिम में आई थी तब वह सिर्फ 16 साल की थी। उसके मन में डर था। उसके दिमाग में सिर्फ खालीपन था। उसकी आँखों में एक बेखौफ सी वीरानगी थी। पर उसके मन में एक दीमी सी रौशनी थी कि एक दिन उसकी खुशी वापस आएगी. इस दौरान उसके मन में एक आशा थी। एक अजीब सी परछाई उसके सपने में उसका पीछा करती थी और कभी वो सपनो में उस परछाई का पीछा किए करती थी।
यह तो सिर्फ वो खुद जानती है या सिर्फ उसका खुदा कि कितनी बार उसने उस परछाई का पीछा क्या था। कभी वो उस परछाई का पीछे करती हुई ऊंचे पहाड़ो को पार किए करती थी।और कभी समंदर पार किया और कभी उसने अग्ग में चलने की कोशिश की थी। उसके मन में सिर्फ एक ही उम्मीद थी कि कोई उसको बुला रहा है। उसके मन में एक अजीब सी खींच पड़ती थी। पर वो बेख़बर थी कि ऐसा क्यों होता है। कोई तो उसको आवाज़ लगा रहा है।
पश्चिम मे दो दिन रहने बाद ही उस को अहसास हो गया था कि दानव भी उसके साथ साथ उसकी किस्मत को लेकर वहां भी आ गए है। अब घरेलू शोषण का सिलसिला शुरू हो गया था, जिसमें शारीरिक और भावनात्मक पीड़ा शामिल थी। लेकिन उसको दर्द नहीं महसूस होता। ना ही उसकी आंखों में आँसू आते थे। पर उसकी खामोशी बढ़ती रही। ना ही उसने अपना दर्द किसी से बांटा और ना ही किसी के आगे उसके आँसूं बाहर आए थे। वो अपने दर्द और आंसू को कागज़ पर लिखा करती थी और फिर चुपके से घर के पीछे जंगल के बीच बने हुआ एक छोटे से तलाव में डाल देती थी। कभी वो अपने खुदा को लिखती और कभी अबू को। अपने जिस्म पर पड़े मार पीट के निशान वो दुनिया से छुपाती रही। उसको विश्वाश था एक दिन खुदा उसका पत्र जरूर पड़ेगा।
पुराने दर्दो की जगह नए दर्दो ने ली थीं। पर दिल में एक आस थी कि एक दिन उसकी मुहबत का बादशाह उसको आजादी देगा। उसको नही पता था कि यह नये दर्द पुराने दर्दो से भी अधिक दर्दनाक होंगे। दोनों दर्द आपस में मिल चुके है। लेकिन वो खुद को मज़बूत बनाने की कोशिश करती है।
अचानक उसकी याद आती है तो उसकी रूह अन्दर से कुरलाती है। उसका प्यार याद आता है पर साथ में उसकी कायरता भी, यो उसके दिल और दिमाग में एक संतुलन पैदा करने में उसकी मदद करते हैं। कभी मुहबत का और कभी उसकी कायरता का पलड़ा भारी हो जाता है।
वो सोचती है कि हर इंसान के अपने ख्याल होते है। जब बात प्यार और मुहबत की होती है तो आधुनिकीकरण के इस दौर में भी उसकी सोच बहुत पुराणी है। अक्सर वो कहती है कि “मेरा और उसका रिश्ता खुदा ने जन्म से पहले बनाया था। कभी वो मेरे साथ बेवफ़ाई करता है और कभी मैं उसके साथ बेवफ़ाई करती हूं । जब वो अपने दिल में मुझे याद करता है तो इस संसार के दूसरे कोने में बैठी मैं उसको महसूस करती है।”
बात जिस्मानी प्यार की नहीं उनकी मुहबत तो रूहानी थी। एक अज़ीब सा बन्दन है यो टूटने का नाम नहीं लेता। उसने सच ही कहा था कि अगर हम जिन्दगी में मिल न सके तो क्या हुआ पर हमारा यह रूहानी प्यार ना ही कभी खत्म होगा और ना ही कभी टूटेगा।
हर कोई उसको मशवरा देता है कि अपने अतीत को भूल कर भविष्य पर ध्यान केंद्रित करो। उसकी आँखों में आंसू आ जाते है। वो सोचती है,”काश किसी ने मेरे दिल की गहराई में उतर कर देखा होता। वो ही मेरा अतीत, भविष्य, और वर्तमान है।”
नहीं, उसने कभी उसको किसी से छीनने की कोशिश नहीं की थी। फिर क्यों उसकी जिंदगी को छीन लिए गया । सिर्फ उससे बात करना चाहती थी। वो कहती रही कि,” मैं कबि भी अपने वतन वापस नहीं आवांगी। मैं अपने पासपोर्ट के भी टुकड़े कर दियांगी। मुझे सिर्फ ईमेल करने की अनुमति दे दो। मुझे और कुछ नहीं चाहिए।” लेकिन सभी ने खुदा बनने का फैसला कर लिया था। यह नहीं सोचा के उनके इस स्वार्थीपन से कोई जिन्दा मर जाएगा। लेकिन वो बुरी तरह से टूट कर भी स्वार्थी नहीं बन पाई। इसलिए इतना दर्द होने के बावजूद भी वो खुदा के आगे उनकी भलाई की मनत करती है।

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